Poemकविता
क्या होगा तुम्हारे बिना
क्या होगा तुम्हारे बिना मेरी इन कविताओं का,कौन जलायेगा इन्हेंऔर इनके अंतिम क्षणों मेंविषाद के आख़िरी और सबसे ज़रूरी आसूँजिससे मेरे हृदय को शीत मिलेगीकौन बहायेगा?
कैसे खोजूँगा तुम्हेंउन वीरान खंडहरों की अबूझ दीवारों मेंलटों जड़ों पत्तियों के बिखरे संसार मेंकैसे उकेरूँगा तुम्हारा निशानकैसे पाऊँगा प्राणइस बयाबान मेंआराम के दो क्षणों का निर्वाण ।
किसकी आहुति मेंमैं ये रक्तरंजित खेल खेलता जाऊँगाकिसको करूँगा युद्ध केअसंख्य अनुष्ठान अर्पणया हारकर,थककर,मरकरआख़िर किसका मुँह ताककरकरूँगाआत्मसमर्पण ।
किसकी याद आएगीजब मुस्कुराता हुआ एक छोटी सी बच्ची का चेहरालौटती हुई अपनी बस सेमुझे देखते हुए गुज़र जाएगाऔर दोनों हाथों में राइफल थामे हुए मैंहाथ भी नहीं लहरा पाऊँगा।